GuruVidya "Bhag 2" (Hindi Edition) por Shrikant Pandey

GuruVidya

Titulo del libro: GuruVidya "Bhag 2" (Hindi Edition)

Autor: Shrikant Pandey

Número de páginas: 104 páginas

Fecha de lanzamiento: October 7, 2018

Obtenga el libro de GuruVidya "Bhag 2" (Hindi Edition) de Shrikant Pandey en formato PDF o EPUB. Puedes leer cualquier libro en línea o guardarlo en tus dispositivos. Cualquier libro está disponible para descargar sin necesidad de gastar dinero.

Descargar PDF Leer on-line

Shrikant Pandey con GuruVidya "Bhag 2" (Hindi Edition)

About Author
श्रीकांत पांडेय का मानना है गुरु बिना ज्ञान अधूरा है, इसलिए श्रीकांत ने जो ज़िंदगी से सीखा है, जो अपने बुजुर्गों से ज्ञान अर्जित किया है, वो आप सभी तक इस पुस्तक के ज़रिए पहुंचा रहा है, श्रीकांत का मानना है जिस तरह लोगों के साथ खुशियां बाटने से कभी खुशी कम नहीं हो जाता है, ठीक उसी तरह श्रीकांत कलम के ज़रिए आप तक अपने कुछ विचारविमर्श रख रहा है, और अपने अंदर जो कमी है उसे पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

About Description
हम सभी सुखी होना चाहते हैं। कोई भी दुखी नही होना चाहता। दुःख दूर करने के उपाय जानने से पहले ये जानते हैं की दुःख क्यों आते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं-
दुःख तीन प्रकार के होते हैं- (1) दैहिक दुःख (2) दैविक दुःख (3) भौतिक दुःख।
1. दैहिक दुःख – दैहिक दुःख वे होते हैं, जो शरीर को होते हैं, जैसे रोग, चोट, आघात, विष आदि के प्रभाव से होने वाले कष्ट। शारीरिक पापों के फलस्वरूप दैहिक दुःख आते हैं। इनके इलाज के लिए आप डॉक्टर के पास जा सकते हैं।
2. दैविक दुःख – दैविक दुःख वे कहे जाते हैं, जो मन को होते हैं, जैसे चिंता, आशंका, क्रोध, अपमान, शत्रुता, बिछोह, भय, शोक आदि। यदि आप किसी के साथ भी बुरा करते हैं तो आपका मन हमेशा इस चीज में रहेगा की आपने बुरा किया। यदि आपके साथ किसी ने बुरा किया तो आप चिंता करेंगे की हमने उसका क्या बिगाड़ा जो उसने हमारे साथ बुरा किया। किसी की मृत्यु हों गई तो आप शोक में डूब गए। कभी डर में जीते हैं। कभी मोह में कभी भय में कभी शोक में। ये सभी दैविक दुःख कहलाते हैं। इनका इलाज दुनिया के किसी भी डॉक्टर के पास नही है। केवल भगवान ही इनका इलाज करें तो करें।